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मैं….कुछ हाइकू


बांधना मत 
हवा का झोंका हूँ मैं 
रुकता नहीं 

*

पानी की धार 
चाहूँ तो काट दूं मैं 
पत्थर को भी

 
*

आग का शोला 
जलता भी, और मैं 
जलाता भी हूँ 

*

गोद में मेरी 
पले हैं ईश्वर भी 
धरती हूँ मैं

 
*

भरें उड़ान 
सपने और पाखी 
आकाश हूँ मैं

 
*

अगले पड़ाव पर ….


 

शर्तों में बंध कर रहना 
न तुमसे होगा 
न मुझसे …..
क्योंकि 
हम दोनों ही कुछ 
अलग ही मिट्टी के बने हैं

फिर आओ 
क्यूँ न हम 
स्वीकार कर लें 
एक दूसरे को 
पूरी उदारता के साथ 
जब जहाँ जैसा की स्थिति में

न कोई 
जो है से ज्यादा की अपेक्षा 
और 
न अपेक्षाएं टूटने का दर्द 
बस 
मित्रता का खुला आसमान
और हम तुम 
पखेरुओं से 
अपनी अपनी 
परवाज नापते हुए 
जब कहीं थक कर 
सुस्ताने बैठे 
तो एक दूसरे को 
स्नेहिल मुस्कान का 
संबल देते हुए

सुस्ता लिए 
तो फिर उड़ चले 
अनंत आकाश में 
उन्मुक्त 
खुली हवा, धूप, बारिश 
सब बटोरते हुए 
अगले पड़ाव पर बांटने के लिए ……

बेघर सपने …


आँखे 

जब तब टटोलने लगती हैं 

गठरी में बंधे 

नए पुराने सपनों को 

न जाने क्यों 

उन्हें तस्कीन ही नहीं होती 

उनके वजूद की 

.

हरदम 

चौकन्नी रहती हैं 

एक डर  के साये में 

खुदा खुदा करके रात काटती हैं 

न जाने कौन से खौफनाक साये 

डाल लें डेरा 

उनकी चौखट पे 

और बेघर हो जाएँ 

उनके सपने ….

 


मत बाँध

मुझे शर्तों में,

और खुद भी

मत रह बंधन में

बस……

दिल की दिल से कहना

दिल की दिल से सुनना

इतना ही बहुत है

मुहब्बत के फ़साने को…..

साथ तो चल ….


 

अगर हबीब नहीं तो न सही रकीब ही सही, साथ तो चल 

दोस्ती नहीं, दुश्मनी ही सही पर चार कदम साथ तो चल 

-:-

जिंदगी में अक्सर बहुत कुछ उलझा सुलझ जाता है, यूँ ही 

जिंदगी पुर-सुकूँ भी हो जाएगी दो-चार कदम साथ तो चल 

-:-

चलो माना कि नहीं आसाँ टूटे हुए रिश्तों को जोड़ लेना 

कुछ शिकवे ही निबट लेंगे तू दो-चार कदम साथ तो चल

-:- 

Happy Fathers Day to all Dads …..


 पिता
तुम विश्वास हो
आस्था भी हो तुम
जिंदगी में हर कदम पर
सजग पहरू से खड़े
सदा थाम लेते हो
जहाँ भी
जरा सा
लडख़ड़ायें हम …..

वो दरख़्त से काँधे
जिन पर चढ़कर
पहली बार
आसमान छूने को
हाथ बढ़ाया था
आज थक बेशक गए हों
लेकिन
उनका भरोसा आज भी
उतना ही अटूट है …..

वो तुम्हारा
थामे रहना
पहली बार
साइकिल चलाते हुए
आज भी देता है
आश्वासन मन को
जो भी हो
तुम हो पीछे
सँभाल ही लोगे
जब जरुरत होगी …..

बस !
यही विश्वास ले कर
लड़ी है
हर लड़ाई जिंदगी की
तुम और
तुम्हारा विश्वास मुझ में
सदा देता है ऊर्जा
हर सफलता के
आसमान छूने की …..

बस यूँ ही
आसमान बन कर
तने रहना
हमारे सिरों पर
सदा बरसना
आशीष बन कर ….

पिता
तुम विश्वास हो
आस्था भी हो तुम
जिंदगी में हर कदम पर ….

Happy Fathers Day to all Dads …..

ऐ रंगरेज़ा …


 

 

ऐ रंगरेज़ा  

रंग दे जीवन 

खुशियों के रंग 

उड़ा उड़ा सा 

फिरा करे फिर 

हुआ बावरा 

मन मलंग 

बांधे 

आशाओं की डोरी  

चूमे नभ 

सपनों की पतंग 

ऐ रंगरेज़ा  

रंग दे जीवन 

खुशियों के रंग !!

 

 

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