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इस दिवाली में ….


दीवाली के दिए उनके लिए रोटी का जरिया हैं
वो मिटटी गूंधते हैं, तो रोटी घर में पकती है

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अंधेरों की घुटन से,  क्या तो छूटेंगे कभी,  ये पर
जले चूल्हे में गर लकड़ी बहुत इनको दिवाली में

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इन्हे तो चाँद भी सपने में, रोटी सा ही दिखता है
मिले भरपेट खाना, इतनी ही तमन्ना है दिवाली में

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चलो कुछ हाथ हम इनका बँटाएं इस दिवाली में
दिये मिटटी के कुछ लेकर जलाएं इस दिवाली में

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मुहैया हमने जो उनको निवाले चार कर पाये
समझेंगे,  उजाला कुछ किया हमने दिवाली में

**

Happy Diwali to all !!

करवाचौथ – दो हाइकू



उगे चाँद सा
बिखरे चांदनी सा
प्यार ही प्यार

लिखवाता है
अनुबंध प्यार के
करवाचौथ !!


भीतर का खौफ
जब आँखों में उतरकर
आंसू बनता है
दर्द बह निकलता है
बेबसी बन कर
वो समझते हैं
हम उनके साथ हैं
लेकिन नहीं
हम साथ नहीं
हम या तो लाचार हैं
या फिर हम नहीं जानते
कि
हमें क्या करना चाहिए
कहाँ जाना चाहिए
बस
इसी लिए हम
उनकी हाँ में हाँ मिलाते हैं
और
उनकी हर  सही गलत बात पे
चाभी भरे खिलौने की तरह
लगातार ताली बजाते हैं ….
हम शायद
ताली बजाने के लिए ही पैदा हुए हैं  ……
जिसका जी चाहे
या फिर
जिसके हाथ में लाठी हो
कुछ जुमले उछाले
और
हमसे ताली बजवा ले
अपनी पीठ ठोंक ले
अपने समर्थ होने की
सनद लिख ले
और
हमारी छाती पर पाँव रख कर
अपना आसमान छू ले !

विजय दशमी !!


 

-:-

दसों दिशाओं में दश-आनन खुले आम घूमा करते हों

ऐसे में कागज का पुतला फूंक भी दो तो क्या होगा

-:-

हर घर हर आँगन हर दिल में रावण जहाँ छुपे पलते हों

ऐसे में कागज का पुतला फूंक भी दो तो क्या होगा

-:-

मूल्य मानवी बेच खा गए जब सब दुनिया के लोग

ऐसे में कागज का पुतला फूंक भी दो तो क्या होगा

-:-

मार सको यदि अंतर्मन के रावण को तो मारो तुम

वर्ना कागज का पुतला फूंक भी दो तो क्या होगा

-:-

उठो एकजुट होकर सब  दृढ़ निश्चय कर संघर्ष करो

अच्छाई की विजय बुराई पर कहने भर से क्या होगा

-:-

सभी को विजय दशमी की शुभकामनायें !!!

सुनो समय !!


सुनो समय 

तुम अच्छे  हो कर 

जल्दी आना …

लम्बा चौड़ा

इंतज़ार अब

मत करवाना !!

 

आते आते 

कुछ मुस्कानें

कुछ खुशियां  

कुछ सपने लाना

सुनो समय

तुम अच्छे  हो कर 

जल्दी आना 

सुबह शाम  

चूल्हा जल पाये 

हर घर आँगन

कुछ ऐसी 

उम्मीदें लाना 

 

सुनो समय 

तुम अच्छे  हो कर 

जल्दी आना 

भूख छीन ले 

बच्चों की दूधिया हंसी 

ऐसी घटनाओं पर

कुछ  अंकुश लगवाना 

सुनो समय 

तुम अच्छे  हो कर 

जल्दी आना 

बेटी 

घर के भीतर-बाहर 

रहे सुरक्षित 

लोगों को

इंसान बनाना 

सुनो समय 

तुम अच्छे  हो कर 

जल्दी आना 

कुछ क्षणिकायें ….


 

हमारा दर्द

तुम्हारी बेरुखी से मिलकर

अक्सर बेपर्दा हो जाता है

छुपाने का हुनर

तो हमें यूँ भी नहीं आता !!!

-:-

चलो अच्छा हुआ

आइनों ने ही समझा दिया

वर्ना

तुम हमारी कहाँ सुनते !!!

-:-

आँसू समेटने को

रुमाल तो बहुत मिलेंगे

मगर जिस सीप में पड़कर

मोती बनजाये, ऐसा दिल

जरा मुश्किल से मिलता है

-:-

यादें भी न ….

बस परिंदो सी ही होती हैं

पल भर मे यहाँ

तो पल भर में वहां

मन के अन्दर ही अन्दर

नाप लेती हैं सारा जहाँ ….

जिंदगी की नाप तौल ….


अक्सर

तोलती रहती है जिंदगी 

हमें अपने तराजू पर

कभी कुछ ज्यादा तो 

कभी कुछ कम ….

बहुत कम ही होता है 

जब 

सब नाप तौल में 

एकदम बराबर हो 

वर्ना तो 

बन्दर बाँट ही लगी रहती है 

कभी खुशियों  का पलड़ा भारी 

तो कभी आंसुओं का  !!

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