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विदेश की धरती पर देश के लोगों के साथ एक गुनगुनाती शाम

हिंदी और हिंदुस्तानियों के नाम
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जून 16, 2018 को फ्रीमोंट कैलिफ़ोर्निया में अखिल विश्व हिंदी ज्योति की एक रंगारंग गोष्ठी संपन्न हुई। गोष्ठी में आदरणीय डॉ. जगदीश व्योम एवं उनका परिवार, आदरणीय राजेश राज जी, उनकी पत्नी, ग़ज़ल गायक डॉ. रोशन भारती , आई. सी. सी. के दिनेश शर्मा, अध्यक्षा नीलू गुप्ता जी तथा उपाध्यक्षा मंजु मिश्रा के साथ साथ विश्व हिंदी न्यास के एवं अखिल विश्व हिंदी ज्योति के माननीय सदस्यों की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. व्योम ने दीप जला कर किया, सस्वर वंदना पाठ संस्था की वरिष्ठ सदस्या आदरणीय शकुंतला बहादुर जी के साथ अतिथियों एवं संस्था के सभी सदस्यों ने मिल कर किया।

सर्व प्रथम अतिथियों एवं सदस्यों का परिचय का आदान-प्रदान हुआ उसके बाद डॉ. व्योम ने हाइकू विधा के बारे में बहुत अच्छी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि हाइकू कोई छंद नहीं है हाइकू अपने आप में एक सम्पूर्ण कविता है। हाइकू लिखना बहुत सरल भी है लेकिन हाइकू लिखना बहुत कठिन भी है उन्होंने हाइकू दर्पण और हाइकू कोष के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि हाइकू का प्रवासी भारतीयों का एक अंक पहले निकल चुका है जिसमे काफी प्रवासी हाइकूकार थे, अब दूसरे अंक की योजना है और वे चाहते हैं कि इस बार जो अंक निकले उसमे और नए लोग भी जुड़ें

डॉ. व्योम ने हाइकू, गीत एवं नवगीत सुनाये। आदरणीय राजेश राज जी ने बहुत ही सुन्दर सुन्दर गीत सुनाये, उनकी प्रभावी प्रस्तुति से सभी श्रोता मन्त्र मुग्ध हो गए। डॉ. रोशन दिनेश, शर्मा, सुनीता माथुर नारायण, दामिनी शर्मा ने गज़ले सुनायीं। नीलू गुप्ता जी, चन्द्रिका जी ने हाइकू सुनाये, शकुंतला बहादुर जी, डी एन्जा की हिंदी विद्यार्थी तान्या बलूजा, तारा दुबे, अर्चना पांडा एवं मंजु मिश्रा ने भी रचना पाठ किया। कुल मिला कर एक बहुत ही यादगार शाम रही. अलका मदान जी ने एक बहुत ही अच्छी और गहरी बात कही कि ” जैसा तुम सुनाओ, वैसा ही कोई सुने, ऐसा ऐसे ही नहीं होता” ये बात बिलकुल सही है कि अच्छी महिफल के लिए जितने महत्त्वपूर्ण अच्छा सुनाने वालेहोते हैं उतना ही अच्छा सुनने वाले भी। अच्छे श्रोताओं के बिना महफ़िल सम्पूर्ण नहीं होती।

गोष्ठी में नीलू गुप्ता जी के सद्यःप्रकाशित हाइकू संग्रह “गगन उजियारा” का विमोचन भी किया गया।

गोष्ठी में उपस्थित अखिल विश्व हिंदी ज्योति एवं विश्व हिंदी न्यास के सभी सदस्यों का धन्यवाद, जो किसी कारणवश नहीं आ सके उनसे अनुरोध कि अगली बार अवश्य समय निकालें और हमारे साथ हिंदी के उत्सव में शामिल हों।

– मंजु मिश्रा

https://gatividhiyan.blogspot.com/search/label/केलिफोर्नियाँ%20में%20गोष्ठी

 

 

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हो सके तो खुद को इंसान बनाए रखिये 

चुटकी भर संवेदना दिल में बचाए रखिये 

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यूँ तो ये, आज के दौर में ज़रा मुश्किल है 

तो भी क्या हर्ज़ है खुद को आजमाए रहिये   

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आज कल हालात हद  से  बदतर है 

हर आस्तीं में सांप बगल में खंजर है

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क्या पता कौन कहाँ दुश्मन निकल आए 

खुद को हर वक्त, पहरे पे लगाए रखिये





 

 

 

Photo.. curtsey Google