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Photo.. curtsey Google




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आँख के बदले आँख

जान के बदले में जान  

दया, क्षमा और अहिंसा में 

अब हम विश्वास नहीं करते न  

होता है सारा जहाँ अँधा तो होने दो 

बनती है सारी धरा मरघट तो बनने दो 

 अँधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को दे

न होगा कोई और न पूछेगा कोई सवाल 

जिसका भी हो होगा मगर होगा 

बस अखंड एकक्षत्र राज्य 

यही तो चाहते हैं न हम  

अहम् ब्रम्हास्मि  

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ये गूंगी मूर्तियाँ

जब से बोलने लगी हैं

न जाने कितनों की

सत्ता डोलने लगी है

जुबान खोली है

तो सज़ा भी भुगतेंगी

अब छुप छुपा कर नहीं

सरे आम…

खुली सड़क पर

होगा इनका मान मर्दन

कलजुगी कौरवों की सभा

सिर्फ ठहाके ही नहीं लगाएगी

बल्कि वीडियो भी बनाएगी

अपमान और दर्द की इन्तहा में

ये मूर्तियाँ

फिर से गूंगी हो जाएँगी

नहीं हुईं तो

इनकी जुबानें काट दी जाएँगी

मगर अपनी सत्ता पर

आँच नहीं आने दी जाएगी

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