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मुट्ठी भर दिए

मील भर अँधेरों को

चुनौती देते हैं

शान से हँसते हैं

और अँधेरे

मन मसोस कर रह जाते हैं

-:-

यही तो है

असली ताकत

उजाले की

जब नन्ही सी रेख

चीर देती है सीना अँधेरे का

और अँधेरे देखते रह जाते हैं

-:-

अँधेरों का हठ

तोड़ने की ठान ली जब

उस नन्हे से माटी के दिए ने 

हवाएँ आँधियाँ बन कर खूब चलीं

मगर वो जाँबाज डरा नहीं डटा रहा

और फिर उजाले के जशन में

अँधेरे अँधेरों मे खो गए !!

-:-

 

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वह …


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वह … 

कभी पंछियों सी उड़ान है

कभी  पर्वतों की ढलान है 

कभी बारिशों से धुली धुली 

कभी डालियों पे खिली खिली 

कभी फूल सी कभी शूल सी 

कभी शहद सी कभी नीम सी ….

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वह/२

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नारी देह धरे का दंड 

जीवन भर …

वर्जनाओं की

सलीब पर टंगे रहना !

.

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वह …


-:-

वह …

जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर 

काटती पत्थर का सीना 

ओढ़ती आँचल वो झीना 

कभी अल्हड़  कभी चंचल 

और कभी नाजुक कली सी 

बह रही पागल नदी सी 

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वह/१


हिंदी दिवस – 14 सितंबर, 2018

हिंदी दिवस पर विशेष   

हिंदी की स्थिति देश में – विदेश में – एक झलक मेरे चश्मे से

 

हिंदी हमारी मातृभाषा है, हमारे देश का एक बड़ा तबका हिंदी ही बोलता है लेकिन फिर भी देश में हिंदी का स्वरुप घूंघट में दबी-ढँकी सहमी सकुचाई घर की बहू के जैसा है। जिसके बिना घर का काम भी नहीं चल सकता लेकिन “घर की मुर्गी दाल बराबर” उसको जो मान-सम्मान और महत्त्व मिलना चाहिए वो भी नहीं मिलता। ऊपर से कहीं अास-पास अंग्रेजी दिख जाये फिर तो कहना ही क्या, उसके सामने हिंदी बेचारी कहीं किसी कोने में दुबकी हुई ही नजर आती है।

विदेश की बात करें तो विदेश में हिंदी स्वागत सत्कार के साथ आमंत्रित अतिथि के जैसी है जिसे प्यार मनुहार के साथ बुलाया जाता है। उसके साथ आदरपूर्ण व्यवहार किया जाता है। मजबूरी के चलते ही सही लेकिन उसे रोज की जिंदगी में शामिल करना बहुत मुश्किल होता है

हिंदी दिवस या विश्व हिंदी दिवस जैसे ख़ास मौकों पर हिंदी का हाल, ढाई दिन को मायके आई तुलसी जैसा होता है, सबकी दुलारी बिटिया के स्वागत-सत्कार में कोई कमी न रह जाए हर ओर बस हिंदी हिंदी की धूम मची रहती है, बड़े बड़े कार्यक्रम भाषण, मालाओं का आदान प्रदान, कुछ सम्मान इत्यादि भी और एक बार ये निपटा नहीं कि बस फिर साल भर की फुर्सत…

अाइए फिर से हिंदी दिवस मनाएँ …


जीवन का आधार तुम्ही हो 

सांसों का सुर तार तुम्ही हो 

बिना तुम्हारे कैसा जीवन 

जीवन की रसधार तुम्ही हो 

जीवन का आधार तुम्ही हो 

सांसों का सुर तार तुम्ही हो ।१।

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दीप तुम्ही हो रंग तुम्ही हो 

हर मंगल त्यौहार तुम्ही हो  

चूड़ी बिंदिया कंगन पायल 

मेरा  सारा श्रृंगार तुम्ही हो 

जीवन का आधार तुम्ही हो 

सांसों का सुर तार तुम्ही हो ।२।

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आँख का सपना दिल की धड़कन 

प्रीत प्यार मनुहार तुम्ही हो 

साँस साँस में व्यक्त हो रहा 

ईश्वर का आभार तुम्ही हो 

जीवन का आधार तुम्ही हो 

सांसों का सुर तार तुम्ही हो ।३।

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सूरज चंदा रात सितारे 

तुम हो तो सब लगते प्यारे 

बिना तुम्हारे जल बिन मछली 

जीवन की जलधार तुम्ही हो 

जीवन का आधार तुम्ही हो 

सांसों का सुर तार तुम्ही हो ।४।

..

तुम …


 
अक्सर 
सोचती हूँ… 
तुम्हे 
शब्दों में समेट लूँ 
या फिर
बाँध दूँ ग़ज़ल में 
न हो तो 
ढाल दूँ 
गीत के स्वरों में ही 
मगर 
कहाँ हो पाता है 
तुम तो 
समय की तरह 
फिसल जाते हो 
मुट्ठी से…
….