Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

कूटनीति


देखो

जिंदगी में

हर किसी से 

जरा संभल कर मिलना 

थोड़ा प्रैक्टिकल भी

जरूर रहना 

थोड़ी ही सही

मगर गुंजाइश 

हर बात की रखना 

वक़्त की

नज़ाकत का भी

पूरा ख़याल रखना 

चाहे जो भी हो 

कोई न कोई रास्ता 

खुला ज़रूर रखना 

सारे ऑपशन्स

एक साथ 

ख़त्म मत कर देना 

आखिर 

कूटनीति भी

कोई चीज़ है या नहीं  !!

 


जिंदगी है 
तो गम भी होंगे 
कभी थोड़े जादा 
तो कभी कम भी होंगे

..

ग़मों के बिना 
जिंदगी का तसव्वुर 
हो ही नहीं सकता 
तो ग़मों को
सलीके से सहेजना 
सीख लेना चाहिए

..

ग़मों को 
थोड़ा खट्टा 
थोड़ा मीठा 
और 
थोड़ा थोड़ा तीखा 
चटपटे अचार सा 
बनाकर रखना 
सीख लेना चाहिए

..

फिर ग़म
जिंदगी को मुश्किल नहीं 
जीने के लायक बना देंगे 
और कोई 
साथ दे न दे 
ये जीवन भर 
साथ निभा देंगे

..

चाँद के पिटारे में….


  

कागजों की कश्तियाँ हैं   

बारिशों का     पानी है 

खट्टी मीठी यादें हैं और 

बस छोटी सी  कहानी है 

**

सुरमयी शामे हैं 

तारों जड़ी रातें हैं 

चाँद के पिटारे में 

कितनी ही बातें हैं

**

सपनों वाली राते हैं 

मीठी मीठी बाते हैं 

महकी महकी साँस में 

प्यार की   कहानी है 

**

कागजों की कश्तियाँ हैं   

बारिशों का     पानी है 

खट्टी मीठी यादें हैं और 

बस छोटी सी कहानी है 


*

तुम हों या हम सब कुछ मनमुताबिक तो नहीं होगा 

इसलिए थोड़ी जहमत हम उठायें, थोड़ी तुम उठाओ 

*
रिश्तों के बीच उलझने हों तो उन्हें सुलझाओ

 उन पर जल्दबाजी में बस कैंची तो मत चलाओ 

*

जहाँ चार बर्तन होंगे तो खट – पट तो होगी ही 

निजात पाने को बर्तनों से पीछा तो मत छुड़ाओ 

*

बैठो, देखो भालो,  कुछ समझो और कुछ समझाओ 

सच्चे रिश्ते बड़ी नेमत है, रूठे हों तो प्यार से मनाओ 

*

खोने में वक्त नहीं लगता,  पाने में उम्र गुज़र जाती है 

इतनी सी बात खुद भी समझो और औरों को भी समझाओ

*

थोड़ी जहमत हम उठायें, थोड़ी तुम उठाओ  !!

 

ख्वाहिशें …


१.

ख्वाहिशें 

परिंदो सी हैं 

छोटी छोटी 

खुशियों की खोज में 

यहाँ वहां उड़ती फिरती हैं  

२.

कितनी ख्वाहिशों ने

दम तोड़े होंगे

तब कहीं जा कर

यह तजुर्बे की चाँदी चढ़ी है

बाल धूप में नहीं पकते 

३.

अल्लाह !  

ये ख्वाहिशों की उड़ान

कहीं, दम ही न ले ले

ख़ुदा ही जाने,

ये निगोड़े पाँव 

कहाँ तक साथ देंगे

४. 

मेरी ख्वाहिशों ने

रिश्ते जोड़ लिए आसमानों से

उगा लिए हैं पंख

और उड़ने लगी हैं हवाओं में

हमने ख़त जब लिखा ….


हमने ख़त जब लिखा तो सब कुछ लिखा 

बस नहीं लिख सके  तो.. अपनी  व्यथा ….

-:-

माँ की आँखों की मद्धम हुयी रौशनी और 

बाबा की खांसी का विवरण लिखा 

खेत साहू  ने गिरवी तो रखे मगर 

बेच डाले बही में हैं ये भी लिखा 

-:-

हमने ख़त जब लिखा तो सब कुछ लिखा 

बस नहीं लिख सके  तो.. अपनी  व्यथा ….

-:-

कुछ घर की लिखी कुछ जग का लिखा 

कुछ इसकी लिखी कुछ उसका लिखा 

क्या पढ़ा तुमने बस   जो … लिखा गया 

या कि वो भी पढ़ा जो रहा अनलिखा

 -:-

हमने ख़त जब लिखा तो सब कुछ लिखा 

बस नहीं लिख सके  तो.. अपनी  व्यथा….

-:-


 

 

 

जिंदगी यदि ठहर जाए,  तो अनूदित मृत्यु है 

और जीने के लिए अविरल भटकना चाहता हूँ

जिंदगी को जिंदगी सा जी सकूँ इसके लिए 

हे प्रिये ! मैं तुम्हारा साथ हर पल चाहता हूँ   

 

….

 

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 637 other followers