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देश मेरी तुम्हारी या किसी की जागीर नहीं है

देश कागज पर कोई खींचीं हुई लकीर नहीं है 

देश न ही कुछ मुट्ठी भर लोगों की विरासत है

देश न ही केवल और केवल बस सियासत है

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देश वो मिटटी है जो गढ़ती है हमें रचती है 

देश वो खुश्बू है जो रग – रग में बसती है  

देश वो नाम है जो दुनिया में नाम देता है 

देश ही तो है जो एक पहचान हमें देता है 

..

देश की माटी को अब यूँ न लजाओ 

देश के नाम पर अपनों का ही खूं न बहाओ  

देश के नाम पर अपने मतलब न सधाओ

देश को देश ही रहने दो खिलौना न बनाओ

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माएँ

कभी बेटियाँ थी

और बेटियाँ भी

कभी माएँ होंगी..

इसी रिश्ते की

रेशमी डोर में लिपटी

एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को

हस्तांतरित होती

प्रेम की परम्पराएँ….

धरोहर हैं ज़िंदगी  की !!

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नारी को

नारी ही रहने दो

देवी मत बनाना

पत्थर की हो जाएगी

 

**



वक्त का

तकाज़ा है या

नए जमाने का चलन

हर चीज का

हर बात का

एक खास दिन मुक़र्रर है

ठीक है तो चलो

आज औरत को भी

सेलिब्रेट करें

उस औरत को

जो जिंदगी की नस नस में

दौड़ती हैं साँसे बनकर

वो औरत

जो धूप के टुकड़े सी है

जिसके बिना जिंदगी

जैसे बारिश की मारी

सीलन वाली बदरंग दीवार

 

**

forever and always


elasays

if IT has what he needs

he will use IT

doesn’t matter what IT looks like

or who IT is

he doesn’t realize

that IT

is a she

he doesn’t care

if she has a name

he doesn’t care

if she has feelings

forget her emotions

her pain

her suffering

she doesn’t matter

nothing does

all that matters is him

and what he needs

or is it what he thinks he needs

no, it is what he wants

he wants power

he wants control

over this poor helpless soul

to make him feel strong

to make him feel powerful

her strength is running out

but she will get up

don’t worry

she is a resilient

beautiful

strong

woman

and we are standing right here

beside her

forever

and always

art by: anonymous

happy international women’s day to all you beautiful women out there.

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सरहदों पर यह लड़ाई

न जाने कब ख़त्म होगी

क्यों नहीं जान पाते लोग

कि इन हमलों में सरकारें नहीं

परिवार तबाह होते हैं

 

कितनों का प्रेम

बिछड़ गया आज ऐन

प्रेम के त्यौहार के दिन

जिस प्रिय को कहना था

प्यार से हैप्पी वैलेंटाइन

उसी को सदा के लिए खो दिया

एक ख़ूंरेज़ पागलपन और

वहशत के हाथों

 

अरे भाई

कुछ मसले हल करने हैं

तो आओ न…

इंसानों की तरह

बैठें और बात करें

सुलझाएं साथ मिल कर

लेकिन नहीं, तुम्हे तो बस

हैवानियत ही दिखानी है

तुम्हे इंसानियत से क्या वास्ता

तुमने तो बस…

चुन लिया है दहशत का रास्ता

 
 
#Pulwama

एक एक कर

बीत गए छह साल

यूँ कहने को रुका तो

कुछ भी नहीं

जिंदगी जैसी चलती थी

वैसी ही चलती रही

लेकिन फिर भी ….

सब कुछ ठीक होते हुए भी

कुछ तो ऐसा है जो ठीक नहीं है

 

लगता है जैसे

तुम्हारे चले जाने से

जिंदगी का सिस्टम हिल सा गया है

अस्तित्व का कोई हिस्सा टूट कर

जगह से निकल सा गया है

जब तक तुम थीं

तुम्हारे होने का अर्थ

ठीक से समझ ही नहीं आया

तुम नहीं होगी तो कैसा लगेगा

यह ख्याल तो

कभी सपने में भी नहीं आया

 

इधर कुछ दिनों से

झांकता है एक तारा

रोज रात को

मेरी खिड़की से

मुस्कराता हुआ

आजकल…

मैं उससे बातें करने लगी हूँ

कहीं वो तुम तो नहीं

 

बहुत याद आती हो तुम… माँ

Feb 4th