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A Black Page in American History

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Friday, June 24th, 2022 marks an attack on women, not just women across this nation but everywhere in the world.

The ruling to overturn Roe v. Wade reverses nearly 50 years of legal precedent and completely changes the landscape of women’s reproductive rights.

This Supreme Court ruling, banning all abortion nationwide, has become a dark page, soon to be chapter, in the history of a “progressive” country like America.

People across the world look to the United States as a superpower, a beacon of freedom and the future. It’s demoralizing and horrifying that just when the world is becoming aware of the rights a woman deserves, starts giving her autonomy, America backtracks nearly 50 years. This inhumane decision completely sabotages recent advancements in social development and equality.

The thought of serious, dangerous consequences like forced pregnancies, infanticide, rape cases, overburdening an already broken foster care system terrifies me. Not to mention that health-related problems will increase with the use of contraceptive medicines and techniques. Deny a woman the right to an abortion and you think she’ll just leave it at that? If someone needs an abortion, they will do anything to get one — Illegal abortions have a multitude of their own dangers, both physical and mental.

What kind of global superpower that preaches equality, opportunity, and human rights for its people takes away a woman’s right to her own body? Forcing a teenager, a child, to carry another child strains physical health, mental health, relationships, societal structures, and the state of the world. Children born to parents who never wanted them will be neglected, cast aside, is that the pro life world you want?

How ridiculous is it to try to save unborn lives by putting the ones who are already here at risk.

Mark my words when I say that this black page in American history will be forever scorned at. No longer do the women of this country trust and support you, we have given you much more than you have ever given us.

America, this is your stamp of shame.

#roevwadeoverturned


मम्मा की प्यारी परी 🥰


प्यार का मौसम ज़ारी है… शृंखला की तीसरी प्रस्तुति

यह मनभावन समंदर की खूबसूरत सी तस्वीर Cabo ट्रिप की है


ख़ुमारी अभी बाक़ी है, प्यार का मौसम ज़ारी है …

प्यार का मौसम / 2


हवाओं ने लिख दी प्रेम कथा प्यार के मौसम में 🙂

प्यार का मौसम / 1



रंगों की खूबसूरत बहार

मौसम में ढेर सारा प्यार

खिलखिलाने लगा नया जीवन

धरती पे छाया नया खुमार 


Haiku writing Workshop – for Hindi Students at Duke University

ड्यूक विश्वविद्यालय के हिंदी छात्रों के साथ एक और कार्यशाला। हाइकु लेखन की यह कार्यशाला बहुत ही रोचक ओर सफल रही। छात्रों द्वारा लिखे गए हाइकु ड्यूक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए हैं। यह वे छात्र हैं जो शुरु से अंग्रेजी में ही पढ़ते सीखते आ रहे हैं, हिंदी को इन्होने अब एक अन्य भाषा के रूप मे सीखना शुरु किया है, इन में से कुछ छात्र तो गैर हिंदी भाषी मूल के भी हैं। इनका हिंदी प्रेम सच में प्रशंसा के लायक है ।

यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यशाला के दौरान छात्रों द्वारा लिखे हाइकु में से कुछ चुने हुए हाइकु प्रसिद्ध हाइकुकार डॅा जगदीश व्योम जी द्वारा संपादित किए जा रहे एक संकलन में भी प्रकाशित किये जाएँगे। इस संकलन में विश्व भर से छात्रों की रचनाओं को लिया जाएगा ।

इस कार्यशाला में लिखे गए कुछ हाइकु तो बहुत ही अच्छे हैं, इनकी गुणवत्ता देख कर यह बिलकुल भी नहीं कहा जा सकता कि यह किसी नौसिखिये ने लिखे होंगे । उदाहरण के लिए यह हाइकु देखें

१।

नयी जगह 

नए लोगों से मिला 

नया तजुर्बा – (दिव्या नटराज)

२।

सुंदर पत्ते 

पेड़ों के कानों में करें 

मीठी बतियाँ – (अमल गुप्ता)

नीचे दिए गए Duke University के लिंक पर इनके हाइकु पढ़े जा सकते हैं

https://sites.duke.edu/dukehindi/2022/01/23/959/

– मंजु मिश्रा




मैं लगभग १९ साल पहले एक बार सर्दियों के मौसम में न्यूयॉर्क आयी थी तब मैने पहली बार जिंदगी में बर्फ देखी थी।  इतनी सर्दी मैंने कभी नहीं महसूस की थी,  घर के अंदर पूरा समय हीट चलने के बावजूद मुझे कंपकंपी ही चढ़ी रहती थी। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ थी। जैसे तैसे जाने का दिन आया,  वापस सैनफ्रांसिस्को  जाते हुए प्लेन  में खूब जोर का बुखार चढ़ा तब जा कर कहीं कंपकंपी बंद हुई।बस  उस दिन मैंने तय कर लिया था कि कभी भी दुबारा सर्दियों में न्यूयॉर्क नहीं आउंगी … उसके बाद कई बार आई लेकिन कभी सर्दी के मौसम में नहीं आई। बहुत बार घर में चर्चा हुई लेकिन मैने कभी यहाँ रहने के बारे में भी नहीं सोचा


लेकिन अब इतने सालों के बाद एक बार फिर मैं यहाँ जनवरी के महीने में भयंकर ठंडी के मौसम में आई हूँ, आई क्या हूँ आना पड़ा है। बर्फ भी पड़ रही है -7 से -10  डिग्री की ज़बरदस्त कडक़ड़ाती हुई सर्दी भी है  लेकिन बेटी का प्यार इस सब पर भारी है।वह यहाँ न्यूयॅार्क यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के लिए आई है, और मैं उसके साथ, उसके कॅालेज, उसके हॅास्टल सब जगह आना जाना कर रही हूँ । आज तो मैं बर्फबारी के बीच बाहर भी निकली …

और भी बहुत कुछ है, वो सब विवरण विस्तार से अगली पोस्ट में, घर वापस पहुँचने के बाद 🙂 तब तक के लिए नमस्ते !