Feeds:
Posts
Comments

Archive for the ‘माँ अौर बेटी ….’ Category


आज तुम 

इतनी बड़ी हो गयी हो 

कि मुझे तुम से 

सर उठा कर 

बात करनी पड़ती है

सच कहूं तो 

बहुत फ़ख्र महसूस करती हूँ 

जब तुम्हारे और मेरे 

रोल और सन्दर्भ 

बदले हुए देखती हूँ 

आज तुम्हारा हाथ

मेरे कांधे पर और 

कद थोड़ा निकलता हुआ  

कभी मेरी ऊँगली और 

तुम्हारी छोटी सी मुट्ठी हुआ करती थी 

हम तब भी हम ही थे 

हम अब भी हम ही हैं 

.
.
(“मेरी बेटी” श्रृंखला की एक और रचना)

Read Full Post »


-:-

मुक्त करो पंख मेरे पिजरे को  खोल दो

मेरे सपनो से जरा पहरा हटाओ तो …

आसमाँ को  छू के मैं तो तारे तोड़ लाऊंगी

एक बार प्यार से हौसला बढाओ तो …

*

 बेटों से नहीं है कम बेटी किसी बात में

सुख हो या दुःख सदा रहती हैं साथ में

वंश सिर्फ बेटे ही चलाएंगे न सोचना

भला इंदिरा थी कहाँ कम किसी बात में

*

बेटियों को बेटियां ही मानो नहीं देवियाँ

पत्थर की मूरत बनाओ नहीं बेटियां

इनसान हैं इनसान बन जीने दो …

हंसने दो रोने दो गाने मुस्कुराने दो

-:-

Read Full Post »


एक परी थी…..   

छोटे छोटे  सपने बुनकर 

आँखों में पहना देती थी 

उसकी बातों मे जादू था

उसके हाथों में जादू था,

बची हुयी कतरन से भी वो 

गुड़िया नयी बना देती थी 

एक परी थी…..

मैं रोऊँ वो उसके पहले 

चेहरे पे मुस्कान सजा के 

चूमचाम कर फूंक मार कर 

मेरी चोट भुला देती थी 

अपनी प्यारी बातों से वो 

मेरा मन बहला देती थी 

एक परी थी…..

एक रोज़  फिर आंधी आई 

और – परी को उड़ा ले गयी 

मेरे अंदर की बच्ची को 

जीवन भर की सजा दे गयी 

रोज रात को ढूंढ रहीं हूँ 

सपना सपना तारे तारे 

कोई तो हो एक बार जो 

मुझसे मेरी परी मिला दे 

एक परी थी…..

-:-

मेरी माँ मेरी परी… आज एक साल और बीत गया… Miss you mom .. Love you 

 

Read Full Post »


माँ की दुआ
बंधीं रहती है
ताबीज सी दिल में
बच्चों के साथ
वो चाहे कहीं भी हो
जब जरा मन उदास हुआ
इक प्यार भरी
थपकी सी लगा देती है
माँ की याद !!

Read Full Post »


माँ

माँ

तुम्हारे होने का अर्थ है

बचपन से एक रिश्ता

जो कभी ख़त्म नहीं होता

जब तक तुम होती हो, हम बच्चे ही होते हैं

-:-

लेकिन तुम्हारे जाते ही

छिन जाता है हमारा बचपन

और हम अचानक ही बड़े हो जाते हैं, फिर

तुम्हारे होने न होने के बीच का फर्क जान पाते हैं

 

Miss you माँ ….

.

.

Read Full Post »


एक सवाल हालात से, समाज से  …

आखिर क्या कमी पड़ जाती है हमारे प्यार में,  बेटियो के प्यारे से रिश्ते में “क्यूँ कमतर हैं बेटियाँ ?” सबकी न सही पर समाज के काफी बड़े तबके की सोच आज भी यही है,  बेटों की चाह मे न जाने कितनी बेटियाँ जन्म से पहले ही मौत की गोद मे सुला दी जाती हैं ….

.

माँ के कलेजे की
धड़कन हैं बेटियाँ
बाप के गुरूर का
परचम हैं बेटियां
जीवन की धूप में
छाँव सी हैं बेटियाँ
सुख हो या दुःख
बांटती हैं बेटियाँ

.

यूँ तो बदली है दुनिया
बदला समाज भी, पर
सच पूछो आज भी
बेटों की चाह में
मरती हैं बेटियाँ
जन्म भी गयीं तो
डरती है सांस-सांस
इंसानों के जंगल में
जब तब बेदर्दी से
लुटती हैं बेटियाँ

.

नाजुक से कन्धों पे
बड़े बड़े काम ले
कहीं कल्पना बछेंद्री
सुनीता हैं बेटियाँ
आसमां को छूती हैं
सागर को चीरती हैं
दुनिया को जीतती हैं
जीवन को रोपती हैं
करती हैं साबित
खुद को हमेशा
फिर भी समाज में
क्यूँ कमतर हैं बेटियाँ ?

Read Full Post »


मैं बन गयी
एक भरा पूरा दरख़्त
तेरी ममता की छाँव तले
तूने मुझे माँ बना दिया
अपने आने से
मुझे सूरज बना दिया
अपनी चमक से
मुझे फूल बना दिया
अपनी महक से
मुझे सपना बना दिया
अपने ख्याल से
मेरी धडकनों को साँसे दे दीं
अपनी साँसों से
मुझे पूरा कर दिया
मेरे वजूद का हिस्सा बनकर
मैं तो बस एक बूँद थी
तूने मुझे दरिया कर दिया
मेरी बेटी
तूने मुझे मुकम्मल कर दिया

-:-

Read Full Post »


**
रोज़ सवेरे वो नन्ही सी चुनमुन 
जगती तो मानो शहर को जगाती 
बाँध के बस्ता निकलती जो घर से 
तो रस्ते में सबको वो चलती पढ़ाती 
** 
फूल हों या पत्ती, या पंछी पखेरू 
सब पर वो अपनी हुकूमत चलाती
नन्ही परी  सी वो इठला के चलती  
दरिया सी  बहती और गुनगुनाती 
** 
बाबा के काँधे पे डाली सी झुकती  
जाने फिर कानों में क्या बड़बड़ाती  
हंसती मचलती औ’ रौनक मचाती 
जीवन में खुशियों के मौसम जगाती 
** 
जादू छड़ी सी वो मुस्कान उसकी 
हजारों सिंड्रेला का जादू भुलाती 
ऐसी है मेरी वो प्यारी सी बिटिया 
मासूम गुड़िया जो सब दुःख भुलाती 
**

Read Full Post »


नमस्कार पाठकों! 

आज मै अपनी नहीं, अपनी नन्ही मुन्नी, आठ साल की बिटिया इला की कविता ले कर आई हूँ… उसने अपने स्कूल के माध्यम से YOUNG AMERICAN POETRY DIGEST नामक एक प्रतियोगिता में अपनी नन्ही कविता “BABY RAIN”  भेजी थी. आप सबके आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं से उसकी कविता का वर्ष २०१२ के लिए चयन हो गया है. नीचे दिए लिंक पर बच्चों के ब्लॉग पतंग की उड़ान पर उसकी कविता पढ़ी जा सकती है.. आपकी टिप्पणियों की प्रतीक्षा रहेगी 

http://patang-ki-udan.blogspot.in/


सादर
मंजु 

Read Full Post »


हमारी सात साल की बेटी इला, जिसने हमारे जीवन को खुशियों से भर दिया, उसने यह महसूस करने का अवसर दिया कि माँ होना क्या होता है, ज़िन्दगी की कितनी बड़ी नियामत है माँ होना ….. उसके लिए यह कुछ पंक्तियाँ …..
**
मेरे घर में मेरे दिल में
मेरी आँखों के ख़्वाबों में
मेरे खुशबू मेरी सांसों
बहारों में चराग़ों में //
**
मुझे हरसूं नज़र आती है
बस तेरी ही परछाईं
मेरे जीवन की सब खुशियाँ
तुम्हारे साथ ही आयीं  //
**
करूँ मै शुक्रिया कैसे
अदा तेरी मुहब्बत का
अता फ़रमाया है तूने
सुकूं मुझको जो ज़न्नत का //
**
मेरे जीवन की थाती है
तेरी मुस्कान नन्ही सी
परियों से भी नाज़ुक है
मेरी बिटिया तू नन्ही सी //
**
तेरी साँसों से जीती हूँ
तेरी साँसों से मरती हूँ
ग़रज़ ये बस कि दुनिया में
तेरी ख़ातिर ही जीती हूँ //
**
उमीदें बांध कर रखीं हैं
पलकों के किनारों पर
ख़ुशी के फ़ूल खिलते हैं
मेरे दिल के चिनारों पर //
**
तेरी मुस्कान और बोसा
मेरी आँखों में पलते हैं
तू जब हँसती है तो घर में
ख़ुशी के दीप जलते हैं  //
**
दिया है क्या हसीं तोहफा
मेरी किस्मत के मालिक ने
बना कर माँ तेरी मुझको
दुनिया मुझको दे डाली

Read Full Post »

Older Posts »