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Posts Tagged ‘जीवन’


 

*

मन के 

आँगन की 

दीवारों पर… 

न जाने कहाँ कहाँ 

कौन कौन सी दरार ढूंढ कर 

उग आती हैं यादें 

और धीरे धीरे 

पीपल सी जड़ें जमा लेती हैं 

फिर एक दिन 

ढह जाती है आँगन की दीवार 

और यादें दफ़न हो जाती हैं 

अपने ही बोझ तले 

*

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ये प्रेम भी 
अजीब चीज है 
पल भर में 
किसी को 
आपके लिए 
पूरा ब्रह्माण्ड सा ही 
बना देता है 
और उसे ही
एक दुर्भाग्यपूर्ण पल में
नजरों से गिरा कर
धूल में भी मिला देता है ।१।

**

प्रेम का होना
और प्रेम का टूटना
दोनों ही स्थितियां
विशेष हैं ….
क्यूंकि
दोनों ही हालात में
आपके पास
अपना
कुछ शेष नहीं रहता ।२।

**

यूँ देखा जाये तो
प्रेम से इतर
जीवन में
कुछ होता नहीं है
प्रेम ही बनाता है
प्रेम ही बिगाड़ता है
सच कहो तो
जीवन को
प्रेम ही चलाता है ।३।

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