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Posts Tagged ‘हिंदी कविता’


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मुक्त करो पंख मेरे पिजरे को  खोल दो

मेरे सपनो से जरा पहरा हटाओ तो …

आसमाँ को  छू के मैं तो तारे तोड़ लाऊंगी

एक बार प्यार से हौसला बढाओ तो …

*

 बेटों से नहीं है कम बेटी किसी बात में

सुख हो या दुःख सदा रहती हैं साथ में

वंश सिर्फ बेटे ही चलाएंगे न सोचना

भला इंदिरा थी कहाँ कम किसी बात में

*

बेटियों को बेटियां ही मानो नहीं देवियाँ

पत्थर की मूरत बनाओ नहीं बेटियां

इनसान हैं इनसान बन जीने दो …

हंसने दो रोने दो गाने मुस्कुराने दो

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