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Posts Tagged ‘हिंदी’


 

*

मन के 

आँगन की 

दीवारों पर… 

न जाने कहाँ कहाँ 

कौन कौन सी दरार ढूंढ कर 

उग आती हैं यादें 

और धीरे धीरे 

पीपल सी जड़ें जमा लेती हैं 

फिर एक दिन 

ढह जाती है आँगन की दीवार 

और यादें दफ़न हो जाती हैं 

अपने ही बोझ तले 

*

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.

बरस महीने दिन 

छोटे छोटे होते 

अदृश्य ही हो जाते हैं 

और मैं 

बैठी रहती हूँ 

अभी भी 

उनको उँगलियों पे 

गिनते हुए 

बार बार 

हिसाब लगाती हूँ 

मगर

जिन्दगी का गणित है कि

सही बैठता ही नहीं

.

.

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