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Posts Tagged ‘poetry’


कोरोना के भय ने सारे समीकरण उल्टे-पुल्टे कर दिए हैं । अब देखिए न कहाँ तो लोगों को हिल-मिल कर साथ-साथ रहने को कहा जाता था और आज सबको सोशल डिस्टेंसिंग रखने को कहा जा रहा है,  एक दूसरे से दूर-दूर रहने की हिदायत दी जा रही है । इसी जमीन पर यह एक शेर बना है…

जऱा सा फ़सला रखिए जनाब हर किसी से 

बहुत नजदीक अाएँगे तो साँसे रूठ जाएँगी

Stay Home, Be Safe, Protest Yourself and Protect Community

 

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बरस महीने दिन 

छोटे छोटे होते 

अदृश्य ही हो जाते हैं 

और मैं 

बैठी रहती हूँ 

अभी भी 

उनको उँगलियों पे 

गिनते हुए 

बार बार 

हिसाब लगाती हूँ 

मगर

जिन्दगी का गणित है कि

सही बैठता ही नहीं

.

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उधेड़ और बुन ….


यूँ तो जीवन में,  
बुनना, उधेड़ना 
और फिर बुनना 
चलता ही रहता है 
लेकिन सच कहो 
क्या फिर से 
टूटे हुए धागों को 
जोड़कर 
नया सा करना,  
बुनकर आकार देना
आसान होता है ?
…नहीं न ! 
तो क्यूँ नहीं 
सीख लेते नाजुक फंदों 
को सहेजना ताकि 
उधेड़ने की नौबत ही न आये 
और बरसों बरसों तक 
बनी रहे गरमाई 
रिश्तों के स्वेटर की 

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